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Thursday, December 31, 2020

VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER की तरफ से नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं (कैलेंडर 2021)

 आप सबको नमस्कार मैं नये साल के शुभ अवसर पर आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।  आप सब स्वस्थ रहे मस्त रहे।यही  भगवान से प्रार्थना करता हूं ।

नववर्ष 2021 का कैलेंडर VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER  ब्लॉग की तरफ से आप सबके लिए कैलेंडर  पोस्ट कर रहा हूँ। 

इस कैलेंडर में विंध्य क्षेत्र के धार्मिक स्थल एवं पर्यटक स्थल की फ़ोटो भी डाला गया है जिससे लोगों को विंध्य के धार्मिक स्थलों एवं पर्यटक स्थलों के बारें में जानकारी हो सके । 

कैलेंडर डाउनलोड करने के लिए लिंक-  https://drive.google.com/file/d/1gAhrWnGMOUGSJlZMnB0iZKELZxuHrgNe/view?usp=drivesdk

अभी तक आप लोगों ने हमारे ब्लॉग को इतना प्यार एवं सहयोग दिया है आशा करता हूं कि आप लोग आगे भी ऐसे ही प्यार एवं सहयोग देंगे।

धन्यवाद 🙏🙏



©Pankajdwivedi
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✍️✍️ पंडित पंकज द्विवेदी , संचालक ब्लॉग

VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER 

Monday, November 23, 2020

ईको टूरिज़्म पार्क पर्यटको के आकर्षण का केंद्र होगा-मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी के पास ईको टूरिज्म एडवेंचर पार्क का शुभारम्भ( Eco tourism park may be the centre of attraction to tourists, mukundpur near white tiger safari in eco tourism adventure park opening now. )

 ईको टूरिज़्म पार्क पर्यटको के आकर्षण का केंद्र होगा-मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी के पास ईको टूरिज्म एडवेंचर पार्क का शुभारम्भ

ईको पार्क मुकुन्दपुर

Eco tourism park may be the centre of attraction to tourists,  mukundpur near white tiger safari in eco tourism adventure park opening now.


 पर्यटन के लिहाज से विंध्य क्षेत्र ने रविवार को मील का एक और पत्थर पार कर लिया। विंध्य के सतना जिले के मुकुंदपुर  को व्हाइट टाइगर सफारी के बाद अब एडवेंचर पार्क  की सौगात भी मिल गई है। पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ ही इको टूरिज्म से जुड़ा यह एडवेंचर पार्क   रीवा , सतना ,सीधी सहित विंध्य क्षेत्र के लोगों के मनोरंजन के लिहाज से एक बेहतर पिकनिक स्थल भी बन गया है। रविवार को एक गरिमामय समारोह में प्रदेश के पंचायत राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने सतना सांसद गणेश सिंह , रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा तथा रीवा के विधायक व प्रदेश के पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल की मौजूदगी में मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी के समीप इस एडवेंचर पार्क का लोकार्पण किया।

  



मौज मस्ती के साथ साहसिक कारनामे


जो अब तक आपने रील लाइफ में देखा है वो अब रियल लाइफ में आप खुद भी कर सकेंगे । अब आप अपने परिवार अथवा दोस्तों के साथ घूमने – फिरने , छुट्टियां और पिकनिक मनाने जा सकेंगे।  मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी   के साथ साथ अब एडवेंचर्स पार्क में भी मनोरंजन और मौज मस्ती करने की एक ऐसी जगह अस्तित्व में आ गई है जहां बच्चे तो बच्चे बड़ों का भी मन खूब रमेगा। ईको टूरिज्म के तहत विकसित किये गए एडवेंचर्स पार्क में बच्चे झूले झूल सकेंगे, खेलकूद सकेंगे और अब तक फिल्मों और टेलीविजन शो में दिखाई पड़ने वाले साहसिक कारनामों का भी मजा ले सकेंगे। सतना वन मंडल द्वारा बनाया गया यह इको पार्क मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू सेंटर के समीप ही बनाया गया है ताकि टाइगर सफारी का भ्रमण करने आने वाले लोग विंध्य की शान सफ़ेद शेर के दीदार के साथ ही एडवेंचर पार्क में भी मौज मस्ती कर सकें।





रस्सी पर चलिए , तार पर झूल कर नदी पार करिये-






विंध्य क्षेत्र  में अपनी किस्म के इस इकलौते पार्क में रोप वाकिंग, रोप क्लाइम्बिग, टायर वाक, जिप लाइन, कैनोपी वाक, साइकिलिंग व तीरंदाजी आदि जैसी साहसिक गतिविधियों के साथ बच्चों के लिये कई तरह के झूले लगाये गये हैं ताकि बड़े व बच्चे सभी इसका आनंद उठा सकें। वनमंडलाधिकारी राजीव कुमार राय ने बताया कि आने वाले समय में यहां और भी कई एडवेंचर्स गतिविधियां शुरू किये जाने के प्लान पर काम चल रहा है। योजना है कि यहां वाटर स्पोर्ट्स की भी कुछ गतिविधियां शुरू की जाएं। पार्क में औषधीय और ग्रहों – नक्षत्रों से जुड़े वृक्षों – पौधों का उद्यान भी विकसित किया गया है। मुकुंदपुर के जंगलों के प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित और संरक्षित रखते हुए विकसित किये गए इस पार्क में ट्री हाउस, वाच टावर्स आदि भी बनाये गए हैं।


मुकुंदपुर से मार्कण्डेय तक बनाएंगे पर्यटन कॉरिडोर –  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री राम खेलावन पटेल


प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने एडवेंचर्स पार्क के लोकार्पण अवसर पर विंध्य की झोली में आई इस एक और सौगात का श्रेय रीवा के विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला को देते कहा कि विंध्य को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाने में श्री शुक्ल का विशेष योगदान है। उन्होंने कहा वाइट टाइगर सफारी एवं जू को विंध्य के लिए एक धरोहर बताते हुए कहा कि इको टूरिज्म इसकी पूर्णता सिद्ध करेगा। यह स्थान पर्यटकों को आकर्षित करेगा। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मुकुंदपुर से रामनगर के मार्कण्डेय तक एक पर्यटन कॉरिडोर बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पर्यटकों को ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व के स्थलों को देखने – जानने का मौका मिल सके।


उन्होंने मुकुंदपुर तालाब का जीर्णोद्धार कराने , पुलिस चौकी की स्थापना कराने का भरोसा दिलाया तथा टाइगर सफारी का एक गेट मुकुंदपुर की तरफ किये जाने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए।


देश – विदेश में बनेगी पहचान –सतना सांसद गणेश सिंह



कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद सतना गणेश सिंह ने कहा कि व्हाइट टाइगर सफारी ने विश्व में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। अब विकास के दूसरे चरण में ईको टूरिज्म पार्क की पहचान भी देश व विदेश में बनेगी। विन्ध्य की धरा में धार्मिक, प्राकृतिक सौंदर्य के साथ खनिज संपदाओं के प्रचुर भण्डार हैं। पार्क के प्रारंभ हो जाने से पर्यटक इन सबका दीदार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि रीवा विधायक श्री शुक्ल के प्रयासों से यह क्षेत्र औद्योगिक कॉरीडोर से जुड़ेगा तथा इसका चहुंमुखी विकास होगा।


संयुक्त प्रयासों का फल – रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा



कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सांसद रीवा जनार्दन मिश्र ने कहा कि रीवा संभाग में पर्यटन के विकास के लिये किये गये संयुक्त प्रयासों का ही फल है कि आज यह क्षेत्र सैलानियों को प्रकृति के सौंदर्य के दर्शन के साथ मनोरंजन के भी संसाधन उपलब्ध करा पा रहा है।


होगी क्षेत्र की तरक्की बढ़ेंगे आय के माध्यम – पूर्व मंत्री व रीवा विधायक  राजेंद्र शुक्ल


इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर अपने उद्बोधन में पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि व्हाइट टाइगर सफारी में आने वाले पर्यटकों को ईको टूरिज्म पार्क सोने में सुहागा जैसा है। व्हाइट टाइगर सफारी एवं जू में आने वाले सैलानी वन्य प्राणियों को देखने के साथ पार्क में एडवेंचर का पूरा मौका उठा सकेंगे। भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग वन्य प्राणियों के दीदार के साथ टूरिज्म पार्क में सुकून के दो पल बिता सकेंगे। यहां बच्चों व बड़ों के लिये मनोरंजन के पूरे इंतजाम किये गये हैं जिसमें लोग साहसिक गतिविधि भी कर सकेंगे।


उन्होंने कहा कि पर्यटन आर्थिक गतिविधि को बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। विन्ध्य में देशी एवं विदेशी सैलानियों के आने से क्षेत्र की तरक्की होगी तथा यह समृद्धशाली क्षेत्र के तौर पर विकसित होगा। उन्होंने कहा कि विन्ध्य प्राकृतिक संपदा से सम्पूर्ण क्षेत्र है। इसे पर्यटन का केन्द्र बनाया जायेगा तथा पर्यटन कॉरीडोर से जोड़ने के सभी कार्य कराये जायेंगे। फोरलेन की सड़कों से जुड़ जाने के कारण अब यह मुख्य धारा में शामिल हो चुका है। सिंगरौली तक रेल लाइन से जुड़ जाने पर विकास के नये मापदण्ड स्थापित होंगे तथा रीवा/सतना में हवाई अड्डा बन जाने से पर्यटकों को यहां आने की सुविधा मिल जायेगी।


ये भी रहे उपस्थित –

कार्यक्रम का संचालन सुदामा शरद ने किया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन संचालक व्हाइट टाइगर एण्ड जू संजय रायखेड़े द्वारा किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर अजय कटेसरिया, जनपद अध्यक्ष अमरपाटन तारा विजय पटेल, सेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक आरबी शर्मा, एडवोकेट सुशील तिवारी,रूपनारायण पटेल रूपए, राजेश तिवारी, विवेक दुबे, विजय पटेल सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पत्रकारगण व बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित रहे।




- पंडित पंकज द्विवेदी संचालक ब्लॉग 

VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER

Saturday, November 21, 2020

मुकुंदपुर में मनोरंजन से भरा ईको पार्क बनकर तैयार 22 नवंबर 2020 को होगा उद्घाटन


 मुकुंदपुर में मनोरंजन से भरा ईको पार्क बनकर तैयार 22 नवंबर 2020 को होगा उद्घाटन 


मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के बगल में ईको पार्क बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया है। इस पार्क में मनोरंजन   के कई साधन  बनाये गए है। इस पार्क का उद्घाटन 22 नवंबर को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रामखेलावन पटेल करेंगे। लिहाजा जू प्रबंधन इसकी तैयारी में जुटा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि मुकुंदपुर को पर्यटन क्षेत्र में तेजी के साथ विकसित किया जा रहा है। व्हाइट टाइगर सफारी के बाद अब ईको पार्क बनाया गया है। इस पार्क में कई तरह के झूले, प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त पार्क समेत मनोरंजन के कई साधन स्थापित किये गए है। पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है। उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके शुभारंभ की तिथि भी निर्धारित कर दी गईं है। प्रदेश के पिछड़ावर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री(स्वतंत्र प्रभार ),पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रामखेलावन पटेल 22 नवम्बर को ईको पार्क का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद सतना गणेश सिंह करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा एवं पूर्व मंत्री तथा रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल होंगे।मुख्य वन संरक्षक ऐ के सिंह एवं डीएफओ सतना राजेश कुमार राय ने कार्यक्रम में उपस्थिति का अनुरोध किया है।

ईको पार्क का निरीक्षण करते हुए पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक  राजेन्द्र शुक्ल जी



30 रुपये होगी इंट्री फीस


कई एकड़ में विकसित ईको पार्क में भीतर जाने के लिए पर्यटकों को 30 रुपये बतौर इंट्री फीस अदा करना होगा । इसमे वह कई तरह के झूले ,पार्क व प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके खुलने का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। इस दौरान पर्यटक पार्क में रह सकेंगे।


जिपलाइन , तीरंदाजी और डार्टिंग भी


बताया जा रहा है कि ईको पार्क में मनोरंजन के भरपूर साधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसमे तीरंदाजी, डार्टिंग  और जिपलाइन भी है। लेकिन इसके लिए अलग से फीस निर्धारित की गई है। पार्क में भीतर जाने पर पर्यटको को अगर मनोरंजन का  लुफ़्त उठाना है ,तो इसकी फीस देनी होगी। जबकि झूले, पार्क और अन्य सभी साधनो को मुफ्त रखा गया है।


" ईको पार्क बनकर तैयार हो चुका है। 22 नवम्बर को माननीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रामखेलावन पटेल  द्वारा उद्धघाटन किया जाएगा। इसके बाद पार्क पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। पार्क में मनोरंजन के कई साधन मौजूद हैं।"

संजय रायखेड़े

जू संचालक



--✍️  पंडित पंकज द्विवेदी  संचालक ब्लॉग

VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER 

Saturday, October 24, 2020

माँ बिरासिनी देवी की जो मन से भक्ति करता है उसकी मनोकामना मईया पूरी करती है




10वी शताब्दी में कलचुरी काल के राजा वीर सिंह ने मंदिर का निर्माण किया था। विंध्य क्षेत्र के उमरिया जिले में स्थित बिरसिंहपुर पाली में माँ बिरासिनी देवी का भव्य मंदिर स्थापित है।


नवरात्रि के पर्व में यहां भक्तों का तांता लगा हुआ है। माँ की भव्य आरती देख सुन कर ही चित्त में आत्म शुद्धि का अनुभव होता है।

ऐसी मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से मां की भक्ति करता है उसकी मनोकामना मैय्या पूरी करती हैं। माँ अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करतीं।

बिरासिनी माता मंदिर बीरसिंहपुर  पाली | birasini mata mandir birsinghpur pali-

बिरासिनी मंदिर में आदिशक्ति स्वरूपा बिरासिनी माता की  10 वीं सदी की  कल्चुरी कालीन काले पत्थर से निर्मित भव्य मूर्ति विराजमान है | यह  पूरे भारत में  माता  काली की उन गिनी चुनी प्रतिमाओं में से एक है । मंदिर के गर्भ गृह में माता के  पास ही भगवान् हरिहर बिराजमान हैं जो आधे  भगवान्  शिव और आधे  भगवान्   विष्णु के रूप हैं | मंदिर के गर्भ गृह के चारो तरफ अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं | मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण , मरही माता, भगवान् जगन्नाथ और शनिदेव के छोटे-छोटे मंदिर भी स्थित हैं | मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित  है |माता की  अलौकिक शक्तियों के कारण लोगों की मनोकामनाएं हमेशा पूरी होती हैं और यहां साल भर लोगों की भीड़ रहती है |

                                 


बिरासिनी माता मन्दिर से जुडी मान्यता -

मान्यतानुसार बिरासिनी माता ने सैंकड़ों वर्ष पूर्व पाली निवासी धौकल नामक व्यक्ति को सपना दिया कि उनकी मूर्ति एक खेत में है जिसे लाकर नगर में स्थापित करो | धौकल नामक व्यक्ति ने मूर्ति लाकर एक छोटी सी मढिया बनाकर माता को बिराजमान कराया | बाद में नगर के राजा बीरसिंह ने एक मंदिर का निर्माण कराकर माता की स्थापना की | 



बिरासिनी माता  मंदिर का पुनर्निर्माण | Rebuilding Of Birasini Mata Temple -

बीरसिंहपुर पाली बिरासिनी माता के प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण का प्रारंभ जगतगुरु शंकराचार्य द्वारका  शारदा पीठाधीश्वर स्वामी श्री स्वरूपानन्द  सरस्वती जी के पावन करकमलों द्वारा माघ शीर्ष कृष्ण पक्ष गुरुवार विक्रम संवत २०४६ ( दिनांक 23 नवम्बर 1989 ) को किया गया और बीरसिंहपुर कालरी /SECL/सभी दानदाताओं के सहयोग से लगभग सत्ताईस लाख रूपये में माता के संगमरमर के भव्य मंदिर पूर्ण हुआ | मंदिर का वास्तुचित्र , वास्तुकार श्री विनायक हरिदास NBCC नई दिल्ली द्वारा निशुल्क प्रदान किया गया |  बिरासिनी माता देवी मंदिर का जीर्णोद्धार का समापन कार्यक्रम , पुनः प्राण प्रतिष्ठा, कलश शिखर प्रतिष्ठा गुरूवार वैशाख शुक्र सप्तमी संवत् २०५६ (22 अप्रेल 1999 ) जगतगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी के शुभाशीष से संपन्न हुआ |

माता बिरासिनी देवी के मंदिर परिसर में दो मुख्य प्रवेश द्वार है और एक द्वार पीछे के तरफ है | मंदिर पूरी तरह संगमरमर से निर्मित है | मंदिर के गर्भ गृह में माता बिरसिनी (काली माता)  बिराजमान हैं  | मंदिर के गर्भ गृह के चारो तरफ अन्य देवी देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर भी हैं | मंदिर के बाजू में मुंडन स्थल है | मुंडन स्थल के सामने ज्योति कलश स्थल है जो एक विशाल तलघर रूपी हाल है जिसमें नवरात्र में लोगों द्वारा हजारों घी और तेल के ज्योति कलशों की स्थापना की जाती है | मंदिर परिसर  में ही मंदिर का समिति  कार्यालय , छोटी धर्मशाला  और भण्डारा स्थल है |



नवरात्र और जवारा विसर्जन 

बीरसिंहपुर पाली बिरासिनी माता के  मंदिर में वर्ष में दो बार शारदेय और चैत्र  में नवरात्र पूजा बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है | जिसमें ना केवल आस-पास के लोग अपितु देश-विदेश  से लोग अपनी मनोकामनायें मांगने के लिए आते हैं और मनोकामनायें पूरी होने पर विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं | नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है | यहां हजारों कि संख्या में घी,तेल और जवारे के कलश स्थापित किये जाते हैं | ज्योति कलश हेतु एक विशाल हाल की व्यवस्था है | जवारे हेतु दो मंजिला व्यवस्था की जाती है | श्रध्दालुओं द्वारा मनोकामना कलश स्थापित करने हेतु मंदिर प्रबंध संचालन समिति द्वारा बहुत अच्छी व्यवस्था की जाती है जिसमेंकोई भी व्यक्ति निश्चित राशि जमा करके घी जवारे कलश, तेल जवारे कलश , मनोकामना कलश,आजीवन घी जवारे कलश ,आजीवन तेल जवारे कलश स्थापित कर सकते हैं  | पूरे नवरात्र में मंदिर परिसर में बच्चो के मुंडन , कर्ण छेदन की व्यवस्था की जाती है | सांथ ही मंदिर समिति और अन्य लोगों द्वारा भण्डारे भी करवाये जाते हैं  और पुरे नौ दिन माता का श्रृंगार , भोग ,पूजा अर्चना बड़े ही श्रध्दा भक्ति से की जाती है | माता बिरासिनी के दरवार सोने-चांदी  के जेवरात सहित लाखो का चढ़ावा चढ़ाया जाता है |

बिरासिनी माता के जवारे विसर्जन बहुत ही प्रसिद्ध है जिसमें हजारों के संख्या  में महिला/पुरुष  जवारे विसर्जन में सम्मिलित होते हैं |


2 मंजिल में बोई जाती है ज्वार

जवारों और प्राचीन प्रतिमा को लेकर प्रसिद्ध इस मां बिरासिनी मंदिर में इस बार २७ हजार से ज्यादा जवारे बोए जा सकते हैं। दो मंजिला में जवारों को बोया जाता है। अभी एक मंजिला पूरा जवारों से भर गया है।दूसरे मंजिल में भी जवारे बोने शुरू किया जाएगा। माता बिरासिनी के दरबार मे श्रद्धालुओ द्वारा मनोकामना कलश स्थापित करने के लिए मन्दिर प्रबन्ध संचालन समिति के द्वारा बेहतर व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में जवारे बोना शुरू कर दिया गया है। भक्तिमय माहौल के बीच जवारों का विसर्जन किया जाता है। इस साल भी १५ हजार से ज्यादा जवारे बोए जा रहे हैं।


बीरसिंहपुर पाली कैसे पहुंचें | How to Reach Birsinghpur Pali - 

रेल मार्ग -   बीरसिंहपुर पाली बिलासपुर – कटनी ट्रेन रूट पर स्थित है | बीरसिंहपुर पाली स्टेशन से बिरसिनी माता मंदिर की दूरी 1/2 (आधा) किलोमीटर है |

सड़क मार्ग-  बीरसिंहपुर पाली  की सड़क मार्ग से जिला मुख्यालय उमरिया से दूरी- 40 किमी० ,शहडोल से दूरी- 38 किमी० ,नौरोजाबाद से -9 किमी० , डिन्डोरी से 77 किमी० , जबलपुर से 150 किमी० , अमरकंटक और बांधवगढ़ से दूरी क्रमशः 70 किमी० और 144 किमी० है | 

वायु मार्ग- निकटतम एयरपोर्ट जबलपुर 150 किलोमीटर है |

#विंध्यप्रदेश , #विंध्य , #बिरासिनीमन्दिर 


-✍️✍️ पंडित पंकज द्विवेदी, संचालक ब्लॉग
VINDHYA PRADESH THE LAND OF WHITE TIGER

Tuesday, October 20, 2020

जलजलिया माँ भक्तों की करती है मनोकामना पूरी ,पहाड़ से हुई थी प्रकट




जलजलिया माँ

सिंगरौली के माड़ा में मौजूद है देवी मंदिर, आदिमानव काल से जुड़ा है इतिहास। श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में वैसे तो कई दर्शनीय स्थल हैं पर माड़ा की जलजलिया मां की बात ही निराली है।


 श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में वैसे तो कई दर्शनीय स्थल हैं पर माड़ा की जलजलिया मां की बात ही निराली है। कहते हैं मां जलजलिया पहाड़ से प्रकट हुई हैं और हर भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं। इस स्थान को आदि मानवकाल से जोड़कर भी देखा जाता है। सिंगरौली रेलवे स्टेशन से करीब 60 किमी. पर स्थान है।


ऊंचे पहाड़ों हरे-भरे जंगलों से आच्छादित यह स्थान बड़ा ही रमणीय है। माड़ा की आदिमानव काल की गुफाओं की श्रृंखला के बीच मां जलजलिया का मंदिर है। पुजारी बताते हैं मां जलजलिया पहाड़ तोड़कर अवतरित हुई हैं।


निर्मल धारा सदा प्रवाहित

विशाल पहाड़ के नीचे से जल की अविरल निर्मल धारा सदा प्रवाहित होती है। इस जलधारा के बारे में कहा जाता है कि पहाड़ के नीचे क्षीर सागर है जहां से यह जलधारा आती है। सदियों पहले देवी की मूर्ति स्थापित कर मां जलजलिया के नाम से लोग उपासना करने लगे। धीरे-धीरे मां की कृपा से लोगों के दुख दर्द दूर हुए और यहां आस्था का मेला लगने लगा।

©vindhyapradeshthelandofwhitetiger


पहाड़ों को काटकर बनाई गई गुफाएं

यहां देशभर से श्रृद्धालू मां के दर्शन के लिए आते हैं। मन्नतें रखते हैं। मां को चुनरी भेंट करते हैं। नारियल रेवड़ी का प्रसाद चढ़ाते हैं। माथा टेक मां से आशीर्वाद लेते हैं। इस स्थान को आदिमानव काल से जोड़ कर देखा जाता है। इसकी वजह माड़ा की गुफाएं हैं। जो आदिमानव काल की हैं। पहाड़ों को काटकर बनाई गई हैं। इन्हीं गुफाओं की श्रृंखला के बीच यह देवी स्थान हैं।


पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही रमणीय स्थल

उसी पहाड़ में है जिसमें माड़ा की 'रावण' गुफा है। इस स्थान की खूबी यह है कि धार्मिक केंद्र तो है ही, पर्यावरण की दृष्टि से भी बहुत रमणीय स्थल है। यहां चहुंओर घनघोर जंगल है। पक्षियों का कलरव सुन आनंद की अनुभूति होती है तो सदानीरा झरने देख मन शीतल हो जाता है। हरी-भरी वादियों के बीच शांति और सुकून मिलता है। इस स्थान तक पहुंचने के लिए बस और आटो मुख्य साधन हैं। बैढऩ बस अड्डे से माड़ा तक बसें चलती हैं तो सिंगरौली रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से आटो कर भी जाया जा सकता है।

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शेषनाग करते हैं यहां शिव का जलाभिषेक

वाकई अद्भुत दृश्य है यहां। मां जलजलिया के स्थान से कुछ ही कदम पर शिवलिंग स्थापित है। जिनके ऊपर शेषनाग के फन से जलधारा निरंतर गिरती रहती है अर्थात शेषनाग भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यह जलधारा मां जलजलिया के स्थान से निकलकर शेषनाग के शरीर में प्रवेश करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पीढिय़ों से सुनते हैं कि यह जलधारा कभी रुकी नहीं। यह चमत्कार सदियों से बरकरार है।

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मकर संक्रांति को जुटता है आस्था का सैलाब

यूं तो हर रोज श्रद्धालू यहां पहुंचते हैं लेकिन मकर संक्रांति को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालू आते हैं। पुजारी पं. रामानुह बताते है कि इस दिन आस्था चरम पर होती है। यह दिन मां जलजलिया का विशेष दिन है। हवन, यज्ञ, अनुष्ठान और कई तरह के संस्कार यहां पर संपन्न कराए जाते हैं। इसके अलावा श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भी श्रद्धालू पूजन-अर्चन करते है। महिलाएं इस दिन अधिक संख्या में पहुंचती हैं। सावन में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

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छत्तीसगढ़ में मां के अपार भक्त

मां जलजलिया जिस स्थान पर विराजीं हैं वहां से छत्तीसगढ़ की सीमा महज कुछ किमी. दूर है। पहाड़ पार करते ही मध्य प्रदेश की सीमा समाप्त और छत्तीसगढ़ की सीमा शुरू हो जाती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती गांवों मेंं मां के अपार भक्त हैं। मां की महिमा का गुणगान वहंा खूब होता है।

-✍️✍️पंडित पंकज द्विवेदी  संचालक ब्लॉग
Vindhya pradesh the land of white tiger

Thursday, June 11, 2020

बांधवगढ़ राट्रीय उद्यान 15 जून से खुलेगा लेकिन इस कोरोना महामारी में सावधानी और सुरक्षा के साथ जाए

Bandhavgarh national park 

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान  15 जून से खुलेगा



कोरोना महामारी के चलते 20 मार्च 2020 से बंद बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर जोन 15 से 30 जून तक पर्यटकों के लिये वापस खुलने जा रहा है। वर्षा ऋतु के दौरान पर्यटक बफर जोन में भ्रमण कर सकेंगे। रिजर्व के क्षेत्र संचालक श्री विंसेंट रहीम की अध्यक्षता में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया जाकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की एडवाईजरी और गाइडलाईन पर विस्तृत चर्चा की गई।

शासन को भेजा प्रस्ताव

बैठक में हुई चर्चानुसार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को खोलने संबंधी तय किये गये दिशा-निर्देशों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसमेंपर्यटकों को प्रवेश गाइडलाइन के आधार पर ही मिलेगा। 10 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु के पर्यटकों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा। आई.डी. कार्ड दूर से दिखाना होगा। 6 पर्यटक एक ही परिवार से हैं तो उन्हें एक ही जिप्सी में प्रवेश दिया जायेगा। अगर एक परिवार से नहीं हैं तो एक जिप्सी वाहन में 4 पर्यटक भ्रमण करेंगे। सभी पर्यटक मास्क, सेनीटाइजर और दो गज दूरी के नियम का पालन करेंगे। कोई पर्यटक पार्क के अन्दर गाड़ी से नीचे नहीं उतर सकेगा। सेन्टर पॉइंट पर खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं होगी। जिप्सी वाहन में प्रवेश और वापस आने पर वाहन मालिक को स्वयं ही सेनीटाइज कराना होगा।


होटल मालिक पार्क जाने से पूर्व पर्यटकों की थर्मल स्क्रीनिंग करेंगे। साथ ही पर्यटन गेट पर भी पुन: थर्मल स्क्रीनिंग होगी। प्रवेश द्वार को रोज तीन बार सेनीटाइज किया जायेगा। पर्यटकों के सम्पर्क में आने वाले जिप्सी चालक और गाइड मास्क और सेनीटाइजर का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगे। कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर पार्क में प्रवेश हरगिज नहीं दिया जायेगा और तत्काल जानकारी प्रशासन को दी जायेगी।

क्षेत्र संचालक ने बताया कि सभी जिप्सी वाहन में सीट कवर नहीं होगा। पार्क के अन्दर थूकना प्रतिबंधित रहेगा। पानी की बोटल और खाने-पीने की चीजें डस्टबिन में न डालकर वाहन के अन्दर रखना होगा। बैठक में उप संचालक श्री सिद्धार्थ गुप्ता, एसडीओ श्री अनिल शुक्ला, पर्यटन प्रभारी श्री बीनू गहरवार, गाइड यूनियन के अध्यक्ष श्री राजेश द्विवेदी, जिप्सी यूनियन के अध्यक्ष श्री रतिभान सिंह और होटल यूनियन के अध्यक्ष श्री ज्ञानेन्द्र तिवारी उपस्थित थे।

--✍️✍️ पंकज द्विवेदी संचालक ब्लॉग
Vindhya pradesh the land of white tiger

Wednesday, March 4, 2020

यहाँ विस्तार से जानिए, बाघो की पहली पसंद क्यों रहे विंध्य के जंगल

Vindhya pradesh the land of White Tiger


World wildlife Day ;  यहाँ विस्तार से जानिए, बाघों की पहली पसंद क्यों रहे, विंध्य के जंगल

विंध्य में वनों की विविधता से जंगल बने रहे बाघों का बसेरा
- दूसरे हिस्सों से आकर अब भी विंध्य के जंगलों में भ्रमण कर रहे हैं बाघ

world wildlife Day, Vindhya forests are the first choice of tigers
रीवा. विंध्य के जंगलों से बाघों का गहरा नाता रहा है। लंबे समय से यहां पर इनका बसेरा रहा है। इन जंगलों में वह सभी संसाधन मौजूद रहे हैं जो बाघों एवं अन्य जानवरों को आकर्षित करते रहे हैं। यहां का भौगोलिक परिदृश्य ऐसा रहा है कि बाघों को उनकी इ'छा के अनुरूप ठहरने और टहलने में कोई रुकावट नहीं होती थी। अब से करीब पांच दशक पहले तक बाघों को मारने में कोई प्रतिबंध नहीं था, इस वजह से बड़ी संख्या में इनका शिकार भी होता था, इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां पर आते रहे हैं। इस क्षेत्र के जंगलों की संरचना ऐसी रही है कि ऊंचे पहाड़ों में घने वन रहे और उनके नीचे नदियों की श्रृंखला रही है। कुछ जगह तो जलप्रपात भी हैं, जिसकी वजह से पानी की जरूरत भी पूरी हो जाती थी। देश में घटती बाघों की संख्या के चलते साठ के दशक से ही जंगल एवं बाघों की सुरक्षा की चर्चा शुरू हो गई थी। इसे कानूनी रूप देने में करीब दस वर्ष का समय लगा और बाघों को विशेष दर्जा देते हुए इनके संरक्षण की शुरुआत की गई। लगातार घटती संख्या का असर विंध्य में भी पड़ा, यहां के जंगलों से बाघ गायब हो गए। लगातार प्रयास होते रहे, जिसकी वजह से अब नेशनल पार्क, ह्वाइट टाइगर सफारी और चिडिय़ाघर स्थापित कर फिर से बाघों की वापसी की गई है। साथ ही अन्य जानवरों की संख्या बढ़ाने के प्रयास शुरू हुए हैं।


- दूसरे जंगल छोड़कर यहां भागकर आ रहे बाघ
पहले देश भर में विंध्य बाघों को लेकर चर्चा रहा है। इनदिनों एक बार फिर यह क्षेत्र बाघों की पसंद का क्षेत्र बनता जा रहा है। पन्ना के नेशनल पार्क से जो बाघ निकलते हैं वह इसी ओर आते हैं। पन्ना से निकलकर सतना के सरभंगा से लेकर रीवा के सेमरिया के जंगल तक बाघ पहुंच रहे हैं। इनदिनों इसी क्षेत्र में ही छह से आठ के बीच में बाघों ने अपना डेरा जमा रखा है। इसी तरह बांधवगढ़ के नेशनल पार्क से निकलने वाले बाघ सीधी के मझौली, सतना के रामनगर, रीवा के गोविंदगढ़ के जंगल तक पहुंच रहे हैं। बीते साल ही करीब आधा दर्जन ऐसी घटनाएं हुई जिसमें गांवों तक बाघ पहुंचे हैं। रीवा जिले के डढ़वा गांव में करीब आठ घंटे तक बाघ की मौजूदगी से पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। कई टीमों ने इसे रेस्क्यू कर सीधी के नेशनल पार्क में छोड़ा। इससे यह साबित होता है कि अब भी यहां के जंगल बाघों के अनुकूल हैं, जिसकी वजह से दूसरे क्षेत्रों से आकर यहां पर बाघ ठहरने का प्रयास कर रहे हैं।
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बाघों को मारने पर लगाया प्रतिबंध
वाइल्ड लाइफ संरक्षण को लेकर रीवा लंबे समय से प्रमुख केन्द्र के रूप में जाना जाता रहा है। 1951 में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ कि उसके बाद से इस क्षेत्र में बाघों का संरक्षण शुरू हो गया। महाराजा मार्तण्ड सिंह को सीधी के कुसमी के जंगल में शिकार के दौरान बाघ का शावक मिला जो सफेद रंग का था। उसे पकड़वाकर गोविंदगढ़ लाया गया और किले में रखा गया। उस दौर में बाघों का जो जितना अधिक शिकार करता था, उसी के अनुरूप उसका वैभव भी माना जाता था। रीवा, सतना एवं सीधी के जंगलों में शिकार करने के लिए दूसरे राÓयों के राजा-महाराजा भी बुलाए जाते थे। साथ ही अन्य शिकारी भी चोरी-छिपे मारते रहे हैं। कुछ वर्षों के बाद मार्तण्ड सिंह ने बाघों का शिकार नहीं करने की घोषणां की और विंध्य के आम लोगों से भी इसकी अपील की। विंध्य प्रदेश के समय इन्हें विशेष शक्तियां भी मिली हुई थी, इस वजह से बाघों का शिकार धीरे-धीरे बंद होने लगा। बाद में केन्द्र सरकार ने वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम बनाया, जिसमें बाघों के साथ ही जंगल के सभी जानवरों को मारने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
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- इंसान से अधिक सम्मान बाघ को मिला
वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर अब दुनियाभर में प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत अब से 70 वर्ष पहले ही रीवा में हो गई थी। यहां गोविंदगढ़ किले में रखे गए पहले जीवित सफेद बाघ मोहन को लोगों की ओर से ऐसा सम्मान दिया गया, जो इंसान से भी अधिक था। महाराजा मार्तण्ड सिंह ने सफेद बाघ मोहन को आप कहकर संबोधित करते थे। इसका असर किले के व्यक्ति पर हुआ और यहां पर आने वाला हर कोई मोहन को उसी तरह का सम्मान देता था। कहा जाता है कि उस समय मोहन के सम्मान में उसके बाड़े के पास कोई तेज आवाज से नहीं बोलता था। इसी से वन्यजीवों के प्रति लगाव भी क्षेत्र के लोगों का बढ़ा। मोहन की जब मौत हुई थी तो उसका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इतना ही नहीं कई दिनों तक रीवा के साथ ही आसपास के जिलों में भी शोक सभाएं आयोजित की गई। कुछ समय पहले दिल्ली के एक प्रोफेसर ने शोध में यह बताया था कि देश में वन्य जीवों में जितना सम्मान मोहन को मिला, दूसरे जानवरों को नहीं मिला है।
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सफेद बाघों को खुले जंगल में छोडऩे का प्रयोग
सफेद बाघों को लेकर देश के साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में शोध हुए हैं। दावा है कि वर्तमान में जहां पर भी सफेद बाघ मौजूद हैं, वह रीवा से भेजे गए पहले सफेद बाघ मोहन के वंशज हैं। लंबे अंतराल के बाद विंध्य के मुकुंदपुर जंगल में एक प्रयोग किया गया और दुनिया की पहली ह्वाइट टाइगर सफारी बनाई गई। यहां पर पहले एक सफेद बाघिन को छोड़ा गया, इसके बाद एक बाघ भी छोड़ा गया। इनदिनों सफेद बाघ का जोड़ा सफारी के खुले जंगल में विचरण कर रहा है। अब तक जहां पर भी सफेद बाघ रहे हैं, उन्हें चिडिय़ाघरों में ही रखा जाता रहा है। लेकिन इनके वंश को बढ़ाने की लगातार उठ रही मांगों के बीच खुले जंगल में छोडऩे की योजना भी सरकार की ओर से बनाई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की सरकार ने वर्ष 2012 में ही एक प्रस्ताव नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी को प्रस्ताव भेजा था। उस दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान ने अनुमति नहीं दी थी। कुछ समय पहले ही संस्थान की ओर से नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी को कहा गया है कि सफेद बाघों को जंगल में बसाया जा सकता है। अब तक यह कहा जाता रहा है कि चिडिय़ाघरों में रहने की वजह से इन बाघों को खुले जंगल में नहीं रखा जा सकता, इनके लिए खुला जंगल उपयुक्त नहीं होगा। लेकिन मुकुंदपुर के ह्वाइट टाइगर सफारी में लगातार करीब चार वर्षों से रह रहे बाघों की रिपोर्ट के साथ ही अन्य कई स्थानों पर अध्ययन के बाद माना गया है कि खुले जंगल में सफेद बाघों को रखा जा सकता है। प्रदेश सरकार ने भी विंध्य क्षेत्र में ही यह प्रयोग करने की तैयारी की है। जिसमें सीधी जिले के संजयगांधी नेशनल पार्क को चिन्हित किया जा रहा है। यहां पर अब रायल बंगाल टाइगरों के बीच ही सफेद बाघ को भी जंगल में छोड़ा जाएगा। इसमें सीधे चिडिय़ाघर के बाघ नहीं छोड़े जाएंगे बल्कि सफारी में कुछ दिन पहले के बाद ही जंगल में छोड़ा जाना है।
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वन्यप्राणियों के प्रति लगाव बढ़ाने का माध्यम बना चिडिय़ाघर
विंध्य क्षेत्र के जंगलों में बाघों के साथ ही हिरणों की प्रजाति के बड़ी संख्या में जानवरों का ठिकाना रहा है। यहां लोगों में जानवरों के प्रति जानने की जिज्ञासा भी रही है। पहले बांधवगढ़ और पन्ना में नेशनल पार्क बनाया गया, इसके बाद सीधी जिले में सबसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र का संजयगांधी नेशनल पार्क स्थापित किया गया। बाद में छत्तीसगढ़ राÓय के गठन के चलते बड़ा हिस्सा सरगुजा और कोरिया जिलों में चला गया। सीधी जिले में ही काले मृगों का संरक्षण करने के लिए बगदरा अभयारण्य भी बनाया गया है। इतना ही नहीं कि विंध्य केवल बाघों और हिरणों तक सीमित रहा हो, सोन नदी में मगरों के लिए भी क्षेत्र आरक्षित किया गया है। कुछ समय पहले ही विंध्य क्षेत्र के मुकुंदपुर में चिडिय़ाघर और ह्वाइट टाइगर सफारी की शुरुआत हुई है। इसकी वजह से वन्यजीवों के प्रति क्षेत्र के लोगों को जानकारी भी हो रही है। दूर-दूर से लोग चिडिय़ाघर के जानवरों को देखने के लिए आते हैं। बाड़ों के बाहर से ही जानवरों की तस्वीरें लेकर लोग इनके बारे में अपनी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर व्यक्त कर रहे हैं। वन्यजीवों के प्रति जानकारी लोगों तक पहुंचाने में यह कारगर साबित हो रहा है। वर्तमान में महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिड़ियाघर एवं टाइगर सफारी मुकुंदपुर में जानवरों की संख्या -
 सफेद बाघ चार, सिंह तीन, रायल बंगाल टाइगर 6, तेंदुआ चार, भालू तीन, करीब आधा सैकड़ा की संख्या में चीतल, बाइल्डबोर तीन, ब्लैक बक पंद्रह, सांभर आठ, नील गाय तीन, चौसिंघा एक,थामिन डिअर 8 सहित अन्य जानवर हैं।
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वन्यजीव विशेषज्ञ की नजर में.............

वन्यजीव ही शान हैं, इनके बिना अस्तित्वहीन हो जाएंगे जंगल
मनुष्य का अस्तित्व वन्यजीवों के अस्तित्व से जुड़ा है, जंगलों में रह रहे सभी वन्यजीवों का इकालाजिकल बैलेेंस स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि किसी जंगल से बाघों या अन्य मांसाहारी जीवों को अलग कर दिया जाए तो कालांतर में वह जंगल अपने आप नष्ट हो जाएगा। मांसाहारी जंतुओं के न रहने से शाकाहारी जंतुओं की संख्या में वृद्धि होने के कारण शाकाहारी पौधे धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे। ठीक इसी तरह यदि किसी जंगल से सभी पक्षियों को हटा दिया जाए तो भी जंगल अपने आप समय के साथ नष्ट हो जाएंगे। क्योंकि जंगलों में पौधों में फूलों के परागण करने एवं बीज निर्माण तथा फलों को खाकर बीजों के वितरण में पक्षी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिस कारण पौधों की जैव विविधता बनी रहती है। पौधों एवं वन्य जीवों की जैव विविधता परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर रहती है। जंगलों में पाए जाने वाले बहुत से कीटों की गांव के खेतों में उगने वाले पौधों के परागण एवं बीज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस प्रकार देश के जंगल अपने वन्यजीवों द्वारा समाज को सेवाएं दे रहे हैं। इन कीटों के न रहने से संबंधित फसलों की पैदावार अपने आप खत्म हो जाएगी। मधुमक्खियों द्वारा शहद निर्माण कर समाज को प्रदान करना एक-दूसरा इको सिस्टम सर्विसेस का उदाहरण है। विंध्य क्षेत्र के जंगलों में से रीवा-सतना के चित्रकूट, मझगवां, ककरेड़ी, गोविंदगढ़ एवं अंतरैला क्षेत्र के जंगलों का अपना अलग महत्व है। देश के मैदानी क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंगल या तो साल प्रभावी जंगल होते हैं या सागौन प्रभावी, लेकिन विंध्य के उपरोक्त क्षेत्रों में पाए जाने वाले जंगल न तो साल प्रभावी हैं और न ही सागौन प्रभावी। विध्ंय क्षेत्र की खूबसूरत भौगोलिक संरचना के कारण ही यहां पर बांधवगढ़, पन्ना एवं संजयगांधी नेशनल पार्क के साथ कई अभयारण्य तथा अमरकंटक का अचानकमार बायोस्फियर रिजर्व स्थापित है। देश का शायद ही ऐसा कोई भूखंड होगा, जहां इस प्रकार वन्यजीवों से धनी वास स्थान होगा। विंध्य के तीनों नेशनल पार्क, अभयारण्य एवं बायोस्फियर रिजर्व आपस में कारीडोर से जुड़े होने के कारण वन्यजीवों की प्रचुरता को बढ़ाते हैं। अत: इन कारीडोर्स को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी विंध्य के सभी लोगों की होती है। कभी-कभी पन्ना नेशनल पार्क के बाघों का चित्रकूट, ककरेड़ी एवं बरदहा घाटी के जंगलों में विचरण करना इस बात की पुष्टि करता है कि यह क्षेत्र एक प्रमुख कारीडोर है, इसको सुरक्षित रखते हुए रीवा के तराई क्षेत्र में नीलगाय की जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण किया जा सकता है।
प्रो. रहस्यमणि मिश्रा, पर्यावरण एवं जीव विज्ञान विशेषज्ञ
(अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के पूर्व कुलपति

वन्यजीवों की संख्या एक नजर में

रीवा

तेंदुआ- 8
भालू- 42
नीलगाय- 3852
जंगली सूअर- 1374
भेड़िया- 25
लकड़बग्गा- 128
चीतल- 108
सांभर- 186
हिरण-76
चौसिंगा-11
चिंकारा-92
लोमड़ी-147
सियार- 779
मोर-330
बाघ- 3


सतना-

टाइगर- 5
इंडियन वोल्फ-40
हाइना-128
हिरन-145
वाइल्ड डॉग-09
लेपर्ड-122
इंडियन फॉक्स-169
गोल्डन जैकाल-696

सीधी

बाघ- 21
तेंदुआ-10
भालू-340
जंगली सूअर-3005
लकड़बग्गा-118

✍✍✍✍---  पंडित पंकज द्विवेदी
संचालक ब्लॉग- vindhya pradesh the land of white tiger

Tuesday, December 31, 2019

नए साल 2020 पर शारदा माता मंदिर मैहर में उमड़ेगी भक्तो की आस्था यहाँ देश विदेश से आने वाले भक्तों का लगेगा ताँता400 जवान तैनात किये गए सुरक्षा व्यवस्था के लिए


नए साल 2020 के आगाज के लिए इस साल के आखिरी दिन 31 दिसंबर से ही मैहर में चाक चौबंद पुलिस व्यवस्था कर दी गयी है। मैहर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 जवानों का बल मंगलवार की शाम 4 बजे लगा दिया गया है। यह पुलिस बल एक जनवरी के दिन भी मौजूद रहेगा। रक्षित निरीक्षक सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी मैहर में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारी एएसपी रहेंगे।

इनके साथ 4 डीएसपी, 10 टीआई ड्यूटी में होंगे। नौवीं बटालियन रीवा से एसएएफ की दो कंपनी ड्यूटी के लिए आ रही है। 100 होमगार्ड जवान होंगे और 200 जिला पुलिस बल के अधिकारी व कर्मचारी लगाए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों को भी दुरुस्त कर लिया गया है। साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम में भी कमियों को पूरा किया जा रहा है ताकि मैहर में आने जाने वाले दर्शनार्थियों पर कैमरे की मदद से भी नजर रखी जा सके।



क्या है मैहर मंदिर का महत्व
कहते हैं मां हमेशा ऊंचे स्थानों पर विराजमान होती हैं। जिस तरह मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहाड़ों को पार करते हुए भक्त वैष्णो देवी तक पहुंचते हैं। ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी 1063 सीढ़ियां लांघ कर माता के दर्शन करने जाते हैं। सतना जिले की मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता के इस मंदिर को मैहर देवी का मंदिर कहा जाता है। मैहर का मतलब है मां का हार। मैहर नगरी से 5 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर माता शारदा देवी का वास है। मां शारदा देवी का मंदिर पर्वत की चोटी के मध्य में। देश भर में माता शारदा का अकेला मंदिर सतना के मैहर में ही है। इसी पर्वत की चोटी पर माता के साथ ही श्री काल भैरवी, भगवान, हनुमान जी, देवी काली, दुर्गा, श्री गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमती माता, ब्रह्म देव और जलापा देवी की भी पूजा की जाती है।

_________✍✍✍ पंडित पंकज द्विवेदी
संचालक ब्लॉग - vindhya pradesh the land of white tiger


रीवा_एयरपोर्ट के निर्माण से विन्ध्य के विकास को मिलेगा नया आयाम

👉#रीवा_एयरपोर्ट के निर्माण से विन्ध्य के विकास को मिलेगा नया आयाम 👉प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi बनारस से वर्चुअली करेंगे रीवा एयरपोर्ट ...